हम communicate कैसे करते हैं :-
हमारे life में हर वक़्त Event होता रहता है और हम हमेशा अपनी reality में जीते हैं ना की real world में, communication model से हम जानेंगे की कैसे हम अपनी reality बनाते हैं और कैसे हम communicate करते हैं इसके हिसाब से, reality हमेशा हमारे सामने होती है लेकिन हम reality से भी information collect करके अपनी reality बना लेते हैं और वैसे जीते हैं और ये होता है हमारे 5 sense से visual, auditory, kinesthetic, olfactory, gasetory और submodality के help से जो की automatically unconciously हो जाता है, शुरुआत के points हैं ये जिसमें हम किसी भी event में देखते हैं , smell करते हैं, feel करते हैं, touch करते हैं फिर information delete , distort & generalise होता है और DDG के साथ ही emotions, values, desisions ,beliefs भी बनते जाते हैं।
उसके बाद concious unconcious register होता है जो भी हमने percieve किया है, फिर next internal state create होता है जो की ( PIR + physiology ) से बनता है उसके बाद हमारा behaviour बनता है।
Behaviour हमारा end result होता है जो पूरे event की वजह से create होता है, behaviour कैसा भी हो relevant या irrelevent ये पूरे event के through ही create होता है।
PIR :- Personal internal representation
इसका मतलब है की हम सब के mind में हर किसी चीज़ की representation होती है, mapping होती है, images होते हैं ,model , portrayal होता है और सबकी representation अलग अलग होती है किसी भी एक चीज़ को लेके इसलिए personal internal representation कहते हैं और इसके हिसाब से हम दुनिया को देखते हैं और दूसरों से व्यवहार रखते हैं , पसंद - नापसंद, अच्छा - बुरा, सुख - दुख, सब इसमें ही है।
Physiology :- इसका मतलब शरीर क्रिया, जो भी हम अपने शरीर के द्वारा दर्शाते हैं उसे ohysiophys कहते हैं
For example :-
a) जब हम खुश होते हैं तो हमारे शरीर क्रिया से पता चल जाता।
b) जब हम गुस्सा होते हैं तो भी हमारे शरीर क्रिया से पता चल जाता है, ऐसे काफी examples हैं-
और physiology का सीधा connection हमारे PIR से होता है, जैसे हमारी PIR होगी वैसे ही हमारी physiology होगी और दोनों को मिला के state बनता है
PIR + Physiology = state
c) State : स्थिति, दशा, हालत, गत- जो हमारी mind की स्थिति होती है वो physiology और PIR को मिला के होती है, इसलिए हमारी स्थिति में फर्क आता है, जैसे आपकी internal representation होगी तुरंत उसी समय आपकी physiology भी बन जाएगी और फिर आप खुद को किसी state ( स्थिति ) में पाएंगे, state 2 type के होते हैं :-
1) Resourceful - साधन संपन्न - कोई भी स्थिति जिसमें हम खुश रहते हैं उसे resourceful state कहते हैं।
2) Unresourcefull state - कोई भी स्थिति जिसमें हम खुशी महसूस नहीं कर पाते इसे unresourcefull state कहते हैं
State के माध्यम से हमारा behaviour create होता है, हमारा व्यवहार
d) Behaviour :- यही एक factor है जिससे हम अच्छे और बुरे बनते हैं लोगों की नज़र में और यहां तक पहुंचने के लिए हमें E1= Reality E2= अपनी reality तक पहुंचना पड़ता है, अगर हम real world में जियें तो कोई problem ऐसी नहीं जो हम solve नहीं कर सकते क्योंकि problem को हम problem नहीं समझते, दिमाग रास्ते निकालने लगता है उसे solve करने के लिए।
हम अगर अपनी reality से real world में झांके जहां event होते हैं तो हमारे दुखों का दायरा कम हो सकता है, इसी communication model से हमारा जीवन चलता है, यहीं से mind की programming होती है।