जरा सोचिए की आप किसी काम को करने जा रहे हैं और काम शुरू कर दिया आप लग के काम कर रहे हैं।
But result नहीं मिल रहा , आप परेशान हो जाते हैं, अब उसे situation में mind काम करना बंद कर देता है कभी कभी।
अब आप लोग ही सोचिये की चुपचाप उस काम से पीछे हट जाना सही है या उस काम के लिए एक और रास्ता ढूंढना सही रहेगा ।
बहुत से case ऐसे हैं जिसमें लोग एक, दो या तीन बार try करने के बाद पीछे हट जाते हैं , backout हो जाते हैं, अपने आप को failure मानने लगते हैं।
अगर इसी failure thinking को हम feedback में convert करने लगे तो सोचिये की कितने changes हम अपने life में कर सकते हैं।
Feedback को समझिए की आपने किसी काम को करने के लिए जो tools & technique use की है उससे ये achieve होने वाला नहीं है।
उस technique को आपने वापस apply नहीं करना है ताकि आपका time save रहे और उतना time आप नए तरीके खोजने में लगाएं ।
और सबसे ज्यादा important बात यह है कि आप जिस चीज़ को achieve करने के लिए इतना कुछ कर रहे हैं वो आपके लिए कितना important है
क्योंकि तभी आप feedback लेने में ज्यादा रुचि लेंगे और काम को नए तरिके से करना शुरू करेंगे।
But result नहीं मिल रहा , आप परेशान हो जाते हैं, अब उसे situation में mind काम करना बंद कर देता है कभी कभी।
अब आप लोग ही सोचिये की चुपचाप उस काम से पीछे हट जाना सही है या उस काम के लिए एक और रास्ता ढूंढना सही रहेगा ।
बहुत से case ऐसे हैं जिसमें लोग एक, दो या तीन बार try करने के बाद पीछे हट जाते हैं , backout हो जाते हैं, अपने आप को failure मानने लगते हैं।
अगर इसी failure thinking को हम feedback में convert करने लगे तो सोचिये की कितने changes हम अपने life में कर सकते हैं।
Feedback को समझिए की आपने किसी काम को करने के लिए जो tools & technique use की है उससे ये achieve होने वाला नहीं है।
उस technique को आपने वापस apply नहीं करना है ताकि आपका time save रहे और उतना time आप नए तरीके खोजने में लगाएं ।
और सबसे ज्यादा important बात यह है कि आप जिस चीज़ को achieve करने के लिए इतना कुछ कर रहे हैं वो आपके लिए कितना important है
क्योंकि तभी आप feedback लेने में ज्यादा रुचि लेंगे और काम को नए तरिके से करना शुरू करेंगे।
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